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बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल
(देशभक्ति, निर्भीक पत्रकारिता और राष्ट्रसेवा का प्रेरक जीवन)*
श्रीराम के वंशज तथा महाराजा अग्रसेन जी के प्रतिष्ठित कुल में जन्मे बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल का अवतरण 21 जनवरी 1945 को कोलकाता महानगर के जोड़ासांकू क्षेत्र में हुआ। आपकी माता श्रीमती जड़िया देवी सरावगी एवं पिता स्वर्गीय श्री गजानंद लिखमीचंद सरावगी थे। मूल रूप से आपका पारिवारिक संबंध राजस्थान के शेखावाटी अंचल स्थित राजगढ़ (चूरू) से रहा है।
आपकी प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुलीय परंपरा में हुई, जहाँ से राष्ट्र, समाज, संस्कृति और अनुशासन के संस्कार जीवन में गहराई से स्थापित हुए। बाल्यकाल से ही आपके व्यक्तित्व में नेतृत्व के गुण स्पष्ट दिखाई देने लगे। छात्र जीवन के दौरान आपने कोलकाता में हिंदीभाषी समाज के अधिकारों और अस्मिता की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाई। उस समय बंगाल में हिंदीभाषियों और मुस्लिम बंगाली समुदाय के बीच उत्पन्न तनाव के दौर में आपने मारवाड़ी समाज को संगठित कर जमीनी स्तर पर संघर्ष का नेतृत्व किया। पश्चिम बंगाल सरकार में तत्कालीन कानून मंत्री श्री ईश्वरी प्रसाद जलान के कार्यकाल के दौरान भी आपने समाजहित से जुड़े विषयों पर प्रभावी भूमिका निभाई।
1962 के भारत-चीन युद्ध ने आपके भीतर राष्ट्रसेवा की भावना को और प्रखर किया। इसी प्रेरणा से आपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रवेश किया और एक संस्कारित स्वयंसेवक के रूप में जनसंघ से जुड़कर राष्ट्रवादी राजनीति एवं संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे। इस दौरान आपको अटल बिहारी वाजपेयी, बलराज माधोक, भैरोसिंह शेखावत, अशोक सिंघल, लालकृष्ण आडवाणी एवं मुरली मनोहर जोशी जैसे राष्ट्रपुरुषों का सानिध्य प्राप्त हुआ। आपने विश्व हिंदू परिषद एवं भारत विकास परिषद में अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त किया।
सन 1971 से आपने पत्रकारिता को मात्र पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम बनाया। माँ सरस्वती को अपनी आराध्य मानते हुए आपने सत्य, निर्भीकता और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को जीवन-साधना के रूप में अपनाया। आप अखिल भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार समिति के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और दशकों से राष्ट्रवादी पत्रकारिता के माध्यम से जनचेतना जाग्रत कर रहे हैं।
आपातकाल (जून 1975 से जनवरी 1977) के दौरान आपने फासीवादी नीतियों के विरुद्ध गुप्त रूप से संघर्ष करते हुए भूमिगत जीवन व्यतीत किया। इस कठिन समय में आपने लोकतंत्र की भावना को जीवित रखने हेतु साहसिक भूमिका निभाई। नेपाल में उद्योगपति सेठ रामलाल गोलछा का आपको सहयोग प्राप्त हुआ, जिन्होंने उस दौर में आपका साथ दिया।
11 दिसंबर 1991 को कन्याकुमारी से प्रारंभ हुई ऐतिहासिक एकता यात्रा में आप सक्रिय रूप से सहभागी रहे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की अखंडता और संप्रभुता को सुदृढ़ करना था। 26 जनवरी 1992 को श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराए जाने की इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में आप समाहित रहे। जम्मू में आपने श्री लालकृष्ण आडवाणी के सानिध्य में आमसभा को संबोधित कर राष्ट्र एकता का संदेश दिया।
अयोध्या आंदोलन के दौरान देशव्यापी आक्रोश और भावनात्मक उथल-पुथल के समय आप अयोध्या गए और जेल भी गए। जब देश आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी ताकतों की जड़ों से जकड़ा हुआ था, तब 21 जनवरी 2013 को आपने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच की स्थापना की। इस मंच का उद्देश्य छल-कपट, तुष्टिकरण और राष्ट्रविरोधी राजनीति की जड़ों पर प्रहार करते हुए हिंदू राष्ट्र की वैचारिक दिशा को सशक्त करना रहा। आज यह मंच 12 वर्षों की यात्रा पूर्ण कर चुका है और माननीय प्रधान सेवक श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2014 को आप हिंदू राष्ट्र की ओर बढ़ते निर्णायक कदम के रूप में देखते हैं, जिसमें विश्वभर में सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण हो रहा है।
23 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 12वें राष्ट्रीय अधिवेशन के माध्यम से आपने हिंदू राष्ट्र के विचार का शंखनाद करते हुए देशभर में एक नई वैचारिक चेतना का संचार किया।
पारिवारिक जीवन में आपकी माता श्रीमती जड़िया देवी सरावगी रहीं। आपके बड़े भाई स्वर्गीय मालचंद्र सरावगी (गुवाहाटी), छोटे भाई श्री रमेश जैन (अगरतला), श्री दिनेश कुमार सरावगी, श्री अनिल सरावगी (अगरतला) तथा बहन श्रीमती सुमन बंसल (कोलकाता) हैं। आपकी धर्मपत्नी श्रीमती राधा देवी सरावगी हैं, जो स्वर्गीय सेठ उदमीरामजी गोयल, डोकवा (राजगढ़, चूरू) की पुत्री हैं। आपकी चार सुपुत्रियाँ, एक सुपुत्र, पुत्रवधू एवं एकमात्र लाडली पौत्री चारवी सरावगी के साथ आपका परिवार सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण है।
आपकी कर्मभूमि राजस्थान और दिल्ली रही है। वर्तमान में आपका निवास मातृछाया, सरावगी मोहल्ला, अशोक स्तंभ के पास, राजगढ़ (चूरू), राजस्थान में है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो राष्ट्रसेवा, पत्रकारिता और वैचारिक संघर्ष के इस दीर्घ और प्रेरक जीवन की स्मृति को और अधिक अर्थपूर्ण बनाता है।
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यह जीवन-परिचय अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ता एवं विचारक अमरदीप सिंह द्वारा श्री सुशील कुमार सरावगी जिंदल से लिए गए साक्षात्कार के आधार पर संकलित, सत्यापित एवं लिखा गया है।
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